Thursday, 17 February 2011

पम  ने  अपनी  प्रेस  वार्ता  में  अपनी  मज़बूरी  बता  दी ... लेकिन  कोई  उनसे  पूछे  की  क्या भूख और बेरोजगारी की मजबूरी है बड़ी है या गठबंधन धर्म निभाने की.. रही बात अर्थव्यवस्था उपर लेन की तो अगर जनता भूखमरी का शिकार होती रहेगी उसके पास रोजगार नहीं रहेगा तो इकोनोमी का ग्राफ ऊँचा दिखाकर भी क्या होगा....

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