Tuesday, 8 March 2011

अरुणा शानबाग को इच्छा मृत्यु नहीं मिली...suprim कोर्ट का ये फैसला वाकई अच्छा है क्योंकि जीने ka अधिकार सबको है...मौत देने के अधिकार किसी को भी नहीं... इस कानून से ज्यादा अच्छा होता की जिस शख्स ने अरुणा की ऐसी हालत की..ऐसे वहशी लोगों के लिए ऐसे कड़े कानून banai jayen ताकि आइन्दा किसी सोहन लाल की वजह से किसि अरुणा को ज़िन्दगी का ये रूप न देखना पड़े... लड़ाई पहले burai ख़त्म करने के लिए होनी चाहिए तब किसी की ज़िन्दगी और मौत per फैसला हो तो ज्यादा अच्छा रहेगा..क्योंकि अगर सोहन लाल नहीं होता तो आज अरुणा ऐसी नहीं होती...और न ही उसके लिए इच्छा मृतु की मांग की जाती....

1 comment:

  1. samaj mein burai hamesha se rahi hai aur aage bhi rahegi... isi ko niyantrit karne ke liye kanoon banaye jaate hain aur police ki vyavastha ki jaati hai... ye kahna sahi hai ki samaj se buraai ko samapt kar dena chahiye... par ye kaam utna hi mushkil bhi hai... bahar haal supreme court ke faisle ko samman ke nazar se dekha jaana chahiye...

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